Tuesday, January 9, 2018

सिंह की दहाड़

सिंह  की दहाड़  
Jan 8 2018 .... 


नया साल नयी उमंग 
तू एक नयी उड़ान ले,
जोश की छलांग भर 
तू सिंह सा दहाड़ ले !

देख  नयी किरणों को ,
सीखा रही तुझे रोज़ नया ,
तू उस किरण की रौशनी से 
अपनी मंज़िल तराश ले!

तू चल अभी तू चल अभी 
मत सोच मंज़िल है कहाँ 
जोश से कदम बढ़ा 
पाएगा मंज़िल वहाँ !

मत सोच जो कुछ बीत गया,
ढलते सूरज संग निकल गया 
अब नए रवि की आग में 
तू सिंह सा दहाड़ ले!

कठनाईयाँ तो रास्ते पर 
निरन्तर तुझे निखारती ,
उस आग का तू पानी बनकर 
अपनी नयी पहचान दे !

जीवन के इस वन में 
कहीं सिंह  तो दहाड़ेगे 
कुछ दूर से गुर्राऐगे ,
तो कुछ करीब भी आएंगे | 

उन सब के बीच खड़ा ,
तू अपनी ताकत बटोर ले ,
अपने स्वाभिमान सहित ,
तू एक बड़ी दहाड़ दे!

एक शिखर ठहराव ले,
देख कहा क्या हो रहा 
कौन  तेरे संग रहा और 
क्या तुझे है मिला ?

न कोई तेरे संग चला ,
न कोई तुझको मिला!!

तू स्वम् भी एक सिंह  है,
किसी की तुझे जरुरत नहीं ,
तेरे स्वम् की ताकत से 
हिल सकती है शायद दुनिया भी !

फिर क्या है डर तुझे 
कोई भय तुझे सताये न ,
अपने लक्ष्य को साधकर 
एक बड़ी दहाड़ दे 
तू सिंह  सा दहाड़ ले 
तु सिंह  सा दहाड़ ले!