सिंह की दहाड़
Jan 8 2018 ....
नया साल नयी उमंग
तू एक नयी उड़ान ले,
जोश की छलांग भर
तू सिंह सा दहाड़ ले !
देख नयी किरणों को ,
सीखा रही तुझे रोज़ नया ,
तू उस किरण की रौशनी से
अपनी मंज़िल तराश ले!
तू चल अभी तू चल अभी
मत सोच मंज़िल है कहाँ
जोश से कदम बढ़ा
पाएगा मंज़िल वहाँ !
मत सोच जो कुछ बीत गया,
ढलते सूरज संग निकल गया
अब नए रवि की आग में
तू सिंह सा दहाड़ ले!
कठनाईयाँ तो रास्ते पर
निरन्तर तुझे निखारती ,
उस आग का तू पानी बनकर
अपनी नयी पहचान दे !
जीवन के इस वन में
कहीं सिंह तो दहाड़ेगे
कुछ दूर से गुर्राऐगे ,
तो कुछ करीब भी आएंगे |
उन सब के बीच खड़ा ,
तू अपनी ताकत बटोर ले ,
अपने स्वाभिमान सहित ,
तू एक बड़ी दहाड़ दे!
एक शिखर ठहराव ले,
देख कहा क्या हो रहा
कौन तेरे संग रहा और
क्या तुझे है मिला ?
न कोई तेरे संग चला ,
न कोई तुझको मिला!!
तू स्वम् भी एक सिंह है,
किसी की तुझे जरुरत नहीं ,
तेरे स्वम् की ताकत से
हिल सकती है शायद दुनिया भी !
फिर क्या है डर तुझे
कोई भय तुझे सताये न ,
अपने लक्ष्य को साधकर
एक बड़ी दहाड़ दे
तू सिंह सा दहाड़ ले
तु सिंह सा दहाड़ ले!
तू एक नयी उड़ान ले,
जोश की छलांग भर
तू सिंह सा दहाड़ ले !
देख नयी किरणों को ,
सीखा रही तुझे रोज़ नया ,
तू उस किरण की रौशनी से
अपनी मंज़िल तराश ले!
तू चल अभी तू चल अभी
मत सोच मंज़िल है कहाँ
जोश से कदम बढ़ा
पाएगा मंज़िल वहाँ !
मत सोच जो कुछ बीत गया,
ढलते सूरज संग निकल गया
अब नए रवि की आग में
तू सिंह सा दहाड़ ले!
कठनाईयाँ तो रास्ते पर
निरन्तर तुझे निखारती ,
उस आग का तू पानी बनकर
अपनी नयी पहचान दे !
जीवन के इस वन में
कहीं सिंह तो दहाड़ेगे
कुछ दूर से गुर्राऐगे ,
तो कुछ करीब भी आएंगे |
उन सब के बीच खड़ा ,
तू अपनी ताकत बटोर ले ,
अपने स्वाभिमान सहित ,
तू एक बड़ी दहाड़ दे!
एक शिखर ठहराव ले,
देख कहा क्या हो रहा
कौन तेरे संग रहा और
क्या तुझे है मिला ?
न कोई तेरे संग चला ,
न कोई तुझको मिला!!
तू स्वम् भी एक सिंह है,
किसी की तुझे जरुरत नहीं ,
तेरे स्वम् की ताकत से
हिल सकती है शायद दुनिया भी !
फिर क्या है डर तुझे
कोई भय तुझे सताये न ,
अपने लक्ष्य को साधकर
एक बड़ी दहाड़ दे
तू सिंह सा दहाड़ ले
तु सिंह सा दहाड़ ले!
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