Saturday, February 27, 2010

माँ

The journey of writing poems starts with you Mom. I must be in 8th standard when I have composed my first creation. My first attempt was on 'You', whom I love the most in the whole world. This poem summarizes about a mother, who devotes and sacrifices her whole life for her child. I remember after finishing it you said a Wow!! and attested a perfection remark with it.

माँ तेरी ममता मेरी जिंदगी है,तू ही मेरा आसमा है तू ही मेरी जमी है!!
गीले में सोकर मुझे सूखे में सुलाया
भूकी प्यासी रही लेकिन मुझको खिलाया!मेरे सुखो के लिए सदा तू दुखो में जली है,माँ तू ही मेरा आसमा है तू ही मेरी जमी है!!

उंगली पकडकर चलना तुने सिखाया
सही जीने का रास्ता तुने दिखाया
मेरी जीत के लिए सदा तू मुश्किलों से लड़ी है,
माँ तू ही मेरा आसमा है ,तू ही मेरी जमीं है!!

मुश्किलों में भी मुझे हसना सिखाया ,
संकटों में भी मुझे लड़ना सिखाया,
मुझे खुश देखने के लिए तू तत्पर खड़ी है
माँ तू ही मेरा आसमा है तू ही मेरी जमीं है!!

में लडती रही हालात से ,न घबराई काली रात से
सतरंगी सपनो की नाव डूब गयी,
आसुओ की बरसात से ,
तेरी ममता की दौलत मेरे पास है तो मुझे क्या कमी है,
माँ तू ही मेरा आसमा है तू ही मेरी जमीं है!!

ममता की इस छाव से मुझे कभी न अलग करना,
रहू में हमेशा तेरे साथ यही दुआ करना !
रहे हम साथ साथ यही दुआ तू करती है,
इसलिए माँ में कहती हु -
माँ तू ही मेरा आसमा है तू ही मेरी जमीं है!!

I love you Mom!! Forever...








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