Tuesday, May 4, 2010

A Dream



When the things mingles up in the mind then the imagination takes the shape of comic n here is the poem about my imagination in the childish rhyme.



अगर ऐसा होता....
हम बोलते पक्षियों की आवाज़ तो कैसा होता,
और पशु करते व्यापार तो कैसा होता..
अगर आसमान में पंक लगाकर उडते हम तो कैसा होता,
पक्षी पशु आते विधालय तो कैसा होता..
होता अगर स्वर्ग में घर तो कैसा होता,
और पोधो पर उगती चोकोलेट तो कैसे होता...
भू गोल की जगह चोकोर होती तो कैसा होता,
नदी में बहते पहाड़ तो कैसा होता..
प्लेन होते नीचे और गाडिया होती ऊपर तो कैसा होता,
हम खेलते परियो के साथ तो कैसा होता..
अगर सरकार होती जंगल में तो कैसा होता,
तो रोज़ वहा एक नया पार्लियामेंट भी तो होता..
न होता कांग्रेस और बाजापा का झगडा ,
क्योकि दादा शेर जो सोल्व करता उनका लफडा..
अगर आज सचमुच ऐसा होता तो धरती क्या से क्या हो जाती,
जो कविता मैंने लिखी शायद वो न लिख पाती...!!!!!!!!

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