Sunday, January 16, 2011

nature's message

प्रकति का सन्देश
जब भी सूर्य की पहली किरण अपनी चादर बिछाती है,
औस्मयी बूंदों में लिपटी हर कली खिल जाती है.
सर्द हवाए अपनी ही धुन में सरगम के गीत सुनती है.
इसी तरह रोज़ सुबह एक नया सन्देश लाती है,
सन्देश एक जुट होने का,
सन्देश कुछ नया करने का !
प्रकति अपने ही आलम में न जाने कितने रंग दिखाती है,
पर हर रंग में प्यार,करुना,ममता,सुन्दरता छलकाती है!
सन्देश देती है हमको की हम भी मानवता अपनाये
मानवता के साथ साथ इंसानियत को भी अपनाये!
झोड़ दे झगडा फजाद ,देश से आतक को ख़तम करे
दिल में प्यार ,मन में उमंग लिए नए भारत का निर्माण करे!
तो आओ प्रकति का यह सन्देश पहुचाये घर घर
नयी दुनिया के साथ सकारत्मक सपनो को करे सच !!

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